Chapter 6 लौहकारी या फोर्जिंग Blacksmithy or Forging [2]

सैट हैमर Set Hammer

फ्लैटर के समान सैट हैमर भी डाई स्टील या टूल स्टील के द्वारा बनाया है। इसकी शेप (shape) कुछ अलग प्रकार की होती है। इसकी बॉटम समतल होती है तथा इसकी नैक में तार का हैण्डिल बँधा होता है। इसका प्रयोग जॉ.। के तेज (sharp) कोने बनाने के लिए किया जाता है।

बीक आयरन Beak Iron

जैसा कि नाम से परिभाषित है इसकी शेप (shape) पक्षी की चोंच के आकार की होती है, इसलिए इसे बीक आयरन (beak iron) कहते हैं। यह डाई स्टील या टूल स्टील का बना होता है। यह आकार में एनविल से छोटा परन्तु उसी आकृति का होता है। इसका उपयोग छोटी, गोल या चौकोर, रिंग आदि तैयार । करने के लिए किया जाता है।

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पंच Punch

पंच एक प्रकार का छेद करने वाला उपकरण है। इसकी बॉडी में हल्का टेपर। भी रखा जाता है, जिससे कि छेद करने के बाद पंच को आसानी से निकाला। जा सके। इसको टूल स्टील द्वारा फोर्ज करके बनाया जाता है। इसको छिद्र के । अनुसार किसी भी आकृति व आकार (shape and size) का बनाया जाता है।

ड्रिफ्ट Drift

यह टूल भी पंच के ही समान होता है परन्तु इसके बीच में कुछ भाग में टेपर नहीं होता। इसका उपयोग पंच द्वारा बनाए गए छेद (hole) को समतल व सही। आकार प्रदान करने के लिए किया जाता है। किसी विशेष साइज व आकार का छिद्र (hole) बनाने के लिए पहले छोटा पंच प्रयोग करके छोटे साइज का होल बना लिया जाता है। डिफ्ट भी टूल स्टील द्वारा बनाया जाता है।

लैग वाइस Leg Vice

लोहकारी में प्रयोग होने वाली वाइस (vice) की फिक्स्ड जॉ के नीचे की लैग कर्मशाला के फर्श तक लम्बी होती है तथा इसका एक सिरा फर्श में गाड़ दिया जाता है। इसलिए इसे लैग वाइस कहते हैं। इस वाइस के द्वारा 12 सेमी मोटी वस्तुओं को भी पकड़ा जा सकता है। इस वाइस की एक लैग जमीन तक होने के कारण यह भारी आघातों (impacts) को भी सहन कर लेती है।

फोर्जिंग ऑपरेशन Forging Operation

अच्छी फोर्जिंग के लिए आवश्यक है कि पूरे फोर्जिंग ऑपरेशन के दौरान इस्पात की प्लास्टिसिटी बनी रहे। जैसे ही तापमान कम हो उसे पुनः गर्म कर। लेना चाहिए। स्टील के उचित तापमान की पहचान उसके रंग के द्वारा की जाती । है। 500°C तापमान पर रंग हल्का ब्राउन तथा 1300°C पर यह सफेद (white) हो जाता है। इससे अधिक तापमान पर स्टील जलने लगती है।

तालिका-विभिन्न तापमानों पर स्टील का रंग

तापमानस्टील का रंग
500°C हल्का भूरा
600°C लाल
800°C हल्का चेरी-लाल
1000°C चमकदार चेरी-लाल
1100°C पीला
1200°C पीला-सफेद
1300°C सफेद

विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्टीलों का तापमान भी भिन्न होता है जैसा नीचे दी। गई तालिका से स्पष्ट है

तालिका-विभिन्न प्रक्रिया में स्टील का तापमान फोर्जिंग

क्र.सं. स्टीलफोर्जिंग अधि.-न्यून.बैण्डिंगपरिष्कृतपंचिंग
1मृदु इस्पात800-1300 8007001100
2उच्च कार्बन स्टील900-11508008001100
3उच्च गति स्टील950-11001000…..…….

फोर्जिंग के द्वारा विशेष शेप (shape) प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के ऑपरेशन किए जाते हैं, जिनमें से निम्न महत्त्वपूर्ण हैं |

ड्रॉइंग आउट Drawing Out

यह फोर्जिंग में सबसे अधिक प्रयोग में आने वाली प्रक्रिया है। इसके द्वारा किसी भी जॉब की लम्बाई या चौड़ाई को बढ़ाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में उस जॉब का अनुप्रस्थ काट कम हो जाता है। ड्रॉइंग आउट के लिए जॉब को एनविल के किनारे या बीक पर रखकर क्रॉस पीन हैमर से पीटते हैं। स्थान विशेष पर अधिक प्रेशर (pressure) पड़ने के कारण मैटल दोनों दिशाओं में बहती है, पर अधिक मैटल लम्बाई में बहती है, इस प्रकार जॉब की लम्बाई।
बढ़ जाती है।

अपसैटिंग Upsetting

ड्रॉइंग की विलोम प्रक्रिया अपसैटिंग होती है अर्थात् जब कार्य वस्तु की लम्बाई । को कम करके उसकी मोटाई (अनुप्रस्थ काट) को बढ़ाया जाए, तो इस प्रक्रिया को अपसैटिंग (upsetting) कहते हैं। वस्तु के जिस भाग में अपसैटिंग करनी हो उस भाग को फोर्ज में लाल गर्म करते (प्लास्टिक अवस्था तक) हैं। इसके बाद एनविल पर सीधा खडा करके उस पर घन का प्रहार करते हैं।हैं।

मोड़ना Bending

बाजार में विभिन्न सैक्शन में उपलब्ध धातुओं के स्टॉक (stock) सीधे (straight) होते हैं। फोर्जिंग शॉप में जॉब को मोड़ वाले स्थान पर प्लास्टिक अवस्था तक गर्म करके तथा एनविल पर रखकर एक सिरे को दबाकर दूसरे पर हैमर से प्रहार किया जाता है। इससे मोड़ पर अनुप्रस्थ काट कुछ कम हो जाता है। अनुप्रस्थ काट को कम होने से बचाने के लिए इस भाग की कुछ अपसैटिंग कर ली जाती है। इसके पश्चात् पुनः लाल गर्म करके बैण्डिग की जाती है।

पंचिंग Punching

आपने हैमर, घन, कुल्हाड़ी या बिसौली आदि में हत्था लगाने के लिए बने छिद्रों को पंचिंग क्रिया द्वारा बनाया जाता है। इसके लिए जॉब को लाल गर्म (red hot) करके उसके अन्दर नियत स्थान पर, पंच को बलपूर्वक हैमर के प्रहारों से प्रवेश कराया जाता है। ये छिद्र पंच की शेप (shape) के अनुसार गोल, चौकोर या अन्य आकति में बनाए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार हाल को आर-पार या बन्द (blind) बनाया जा सकता है।

डिफ्टिग Drifting

मटपर रखा जाता है जिससे कि यह आसानी से पंचिंग के बाद जॉब के बाहर आ सके। इस कारण इसके द्वारा बनाया गया होल भी टेपर में ही बनता है। किसी निश्चित साइज का होल बनाने के लिए इसे उससे छोटे साइज व आकार का बनाया जाता है। ड्रिफ्टिग के द्वारा पंच किए गए होल की फिनिशिंग भी हो जाती है। ड्रिफ्टिंग के लिए प्रयोग होने वाले औजार को ड्रिफ्ट कहते हैं।

फोर्ज वैल्डन Forge Welding

फोर्ज वैल्डन प्रक्रिया फोर्जिंग शॉप में कार्यखण्डों को सही रूप देने के पश्चात् आपस में जोड़ने के लिए की जाती है; जैसे-लोहे के कड़े या चेन के लिंक आदि।
फोर्ज के अन्दर धातु खण्डों के उन सिरों को जिन्हें वैल्ड करना है, एक साथ फोर्ज तापक्रम तक गर्म करते हैं। तत्पश्चात् विशेष स्थिति में रखकर उनके ऊपर प्रेशर डालने के लिए घन या हैमर का प्रहार करते हैं। इससे उनके अणुओं के बीच इन्ट्रा-मोलीकुलर-अट्रैक्शन (intra-molecular-attraction) पैदा हो जाता है तथा वे सदा के लिए जुड़कर वैल्डन जोड़ बनाती हैं। वैल्डन द्वारा चार प्रकार के जोड़ बनाए जाते हैं।

बट जोड़ Butt Joint

जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है, बट जोड़ के सिरे आमने-सामने सीधे जोड़े जाते हैं।

लैप जोड़ Lap Joint

लैप जोड़ बनाने के लिए कार्यखण्डों के सिरों पर अपसैटिंग द्वारा फैलाकर । टेपर कर लिया जाता है; अब उनको पुन: गर्म करके एक-दूसरे पर चढ़ाकर घन या हैमर का प्रहार करते हैं। इससे दोनों सतहों के मध्य उपस्थित स्लैग । बाहर आ जाता है।

V’ जोड़ ‘V’ Joint

‘V’ जोड़ बनाने के लिए एक सिरे को VC आकार का बनाते हैं तथा दूसरे को- तिकोना इस प्रकार बनाते हैं कि दूसरे सिरे-
की ‘V’ में ठीक प्रकार से बैठ जाए।

T’ जोड़ ‘T Joint

दो छड़ों को ‘T आकार में जोड़ने के लिए इस जोड़ का प्रयोग किया जाता है।

फोर्जिंग के लाभ
Advantages of Forging

अन्य मशीनिंग प्रक्रियाओं की तुलना में फोर्जिंग प्रक्रिया के निम्न लाभ हैं

(i) फोर्जिंग प्रक्रिया में धातु का कोई स्क्रैप (scrap) नहीं बनता।

(ii) फोर्जिंग के पश्चात् जॉब की धातु के यान्त्रिक गुणों में विकास होता है।

(iii) फोर्जिंग करने से जॉब की धातु के कणों की आन्तरिक संरचना में सुधार। होता है, जिससे उसकी इलास्टिसिटी (elasticity), टफनेस (toughness) तथा धक्का सहन करने की शक्ति (impact resistanti बढ़ जाती है।

(iv) फोर्जिंग के द्वारा, कोल्ड वर्किंग (cold working) से उत्पन्न दुर्गुण । (defects) समाप्त हो जाते हैं।

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