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Chapter 6 लौहकारी या फोर्जिंग Blacksmithy or Forging [2]

सैट हैमर Set Hammer

फ्लैटर के समान सैट हैमर भी डाई स्टील या टूल स्टील के द्वारा बनाया है। इसकी शेप (shape) कुछ अलग प्रकार की होती है। इसकी बॉटम समतल होती है तथा इसकी नैक में तार का हैण्डिल बँधा होता है। इसका प्रयोग जॉ.। के तेज (sharp) कोने बनाने के लिए किया जाता है।

बीक आयरन Beak Iron

जैसा कि नाम से परिभाषित है इसकी शेप (shape) पक्षी की चोंच के आकार की होती है, इसलिए इसे बीक आयरन (beak iron) कहते हैं। यह डाई स्टील या टूल स्टील का बना होता है। यह आकार में एनविल से छोटा परन्तु उसी आकृति का होता है। इसका उपयोग छोटी, गोल या चौकोर, रिंग आदि तैयार । करने के लिए किया जाता है।

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पंच Punch

पंच एक प्रकार का छेद करने वाला उपकरण है। इसकी बॉडी में हल्का टेपर। भी रखा जाता है, जिससे कि छेद करने के बाद पंच को आसानी से निकाला। जा सके। इसको टूल स्टील द्वारा फोर्ज करके बनाया जाता है। इसको छिद्र के । अनुसार किसी भी आकृति व आकार (shape and size) का बनाया जाता है।

ड्रिफ्ट Drift

यह टूल भी पंच के ही समान होता है परन्तु इसके बीच में कुछ भाग में टेपर नहीं होता। इसका उपयोग पंच द्वारा बनाए गए छेद (hole) को समतल व सही। आकार प्रदान करने के लिए किया जाता है। किसी विशेष साइज व आकार का छिद्र (hole) बनाने के लिए पहले छोटा पंच प्रयोग करके छोटे साइज का होल बना लिया जाता है। डिफ्ट भी टूल स्टील द्वारा बनाया जाता है।

लैग वाइस Leg Vice

लोहकारी में प्रयोग होने वाली वाइस (vice) की फिक्स्ड जॉ के नीचे की लैग कर्मशाला के फर्श तक लम्बी होती है तथा इसका एक सिरा फर्श में गाड़ दिया जाता है। इसलिए इसे लैग वाइस कहते हैं। इस वाइस के द्वारा 12 सेमी मोटी वस्तुओं को भी पकड़ा जा सकता है। इस वाइस की एक लैग जमीन तक होने के कारण यह भारी आघातों (impacts) को भी सहन कर लेती है।

फोर्जिंग ऑपरेशन Forging Operation

अच्छी फोर्जिंग के लिए आवश्यक है कि पूरे फोर्जिंग ऑपरेशन के दौरान इस्पात की प्लास्टिसिटी बनी रहे। जैसे ही तापमान कम हो उसे पुनः गर्म कर। लेना चाहिए। स्टील के उचित तापमान की पहचान उसके रंग के द्वारा की जाती । है। 500°C तापमान पर रंग हल्का ब्राउन तथा 1300°C पर यह सफेद (white) हो जाता है। इससे अधिक तापमान पर स्टील जलने लगती है।

तालिका-विभिन्न तापमानों पर स्टील का रंग

तापमानस्टील का रंग
500°C हल्का भूरा
600°C लाल
800°C हल्का चेरी-लाल
1000°C चमकदार चेरी-लाल
1100°C पीला
1200°C पीला-सफेद
1300°C सफेद

विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्टीलों का तापमान भी भिन्न होता है जैसा नीचे दी। गई तालिका से स्पष्ट है

तालिका-विभिन्न प्रक्रिया में स्टील का तापमान फोर्जिंग

क्र.सं. स्टीलफोर्जिंग अधि.-न्यून.बैण्डिंगपरिष्कृतपंचिंग
1मृदु इस्पात800-1300 8007001100
2उच्च कार्बन स्टील900-11508008001100
3उच्च गति स्टील950-11001000…..…….

फोर्जिंग के द्वारा विशेष शेप (shape) प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के ऑपरेशन किए जाते हैं, जिनमें से निम्न महत्त्वपूर्ण हैं |

ड्रॉइंग आउट Drawing Out

यह फोर्जिंग में सबसे अधिक प्रयोग में आने वाली प्रक्रिया है। इसके द्वारा किसी भी जॉब की लम्बाई या चौड़ाई को बढ़ाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में उस जॉब का अनुप्रस्थ काट कम हो जाता है। ड्रॉइंग आउट के लिए जॉब को एनविल के किनारे या बीक पर रखकर क्रॉस पीन हैमर से पीटते हैं। स्थान विशेष पर अधिक प्रेशर (pressure) पड़ने के कारण मैटल दोनों दिशाओं में बहती है, पर अधिक मैटल लम्बाई में बहती है, इस प्रकार जॉब की लम्बाई।
बढ़ जाती है।

अपसैटिंग Upsetting

ड्रॉइंग की विलोम प्रक्रिया अपसैटिंग होती है अर्थात् जब कार्य वस्तु की लम्बाई । को कम करके उसकी मोटाई (अनुप्रस्थ काट) को बढ़ाया जाए, तो इस प्रक्रिया को अपसैटिंग (upsetting) कहते हैं। वस्तु के जिस भाग में अपसैटिंग करनी हो उस भाग को फोर्ज में लाल गर्म करते (प्लास्टिक अवस्था तक) हैं। इसके बाद एनविल पर सीधा खडा करके उस पर घन का प्रहार करते हैं।हैं।

मोड़ना Bending

बाजार में विभिन्न सैक्शन में उपलब्ध धातुओं के स्टॉक (stock) सीधे (straight) होते हैं। फोर्जिंग शॉप में जॉब को मोड़ वाले स्थान पर प्लास्टिक अवस्था तक गर्म करके तथा एनविल पर रखकर एक सिरे को दबाकर दूसरे पर हैमर से प्रहार किया जाता है। इससे मोड़ पर अनुप्रस्थ काट कुछ कम हो जाता है। अनुप्रस्थ काट को कम होने से बचाने के लिए इस भाग की कुछ अपसैटिंग कर ली जाती है। इसके पश्चात् पुनः लाल गर्म करके बैण्डिग की जाती है।

पंचिंग Punching

आपने हैमर, घन, कुल्हाड़ी या बिसौली आदि में हत्था लगाने के लिए बने छिद्रों को पंचिंग क्रिया द्वारा बनाया जाता है। इसके लिए जॉब को लाल गर्म (red hot) करके उसके अन्दर नियत स्थान पर, पंच को बलपूर्वक हैमर के प्रहारों से प्रवेश कराया जाता है। ये छिद्र पंच की शेप (shape) के अनुसार गोल, चौकोर या अन्य आकति में बनाए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार हाल को आर-पार या बन्द (blind) बनाया जा सकता है।

डिफ्टिग Drifting

मटपर रखा जाता है जिससे कि यह आसानी से पंचिंग के बाद जॉब के बाहर आ सके। इस कारण इसके द्वारा बनाया गया होल भी टेपर में ही बनता है। किसी निश्चित साइज का होल बनाने के लिए इसे उससे छोटे साइज व आकार का बनाया जाता है। ड्रिफ्टिग के द्वारा पंच किए गए होल की फिनिशिंग भी हो जाती है। ड्रिफ्टिंग के लिए प्रयोग होने वाले औजार को ड्रिफ्ट कहते हैं।

फोर्ज वैल्डन Forge Welding

फोर्ज वैल्डन प्रक्रिया फोर्जिंग शॉप में कार्यखण्डों को सही रूप देने के पश्चात् आपस में जोड़ने के लिए की जाती है; जैसे-लोहे के कड़े या चेन के लिंक आदि।
फोर्ज के अन्दर धातु खण्डों के उन सिरों को जिन्हें वैल्ड करना है, एक साथ फोर्ज तापक्रम तक गर्म करते हैं। तत्पश्चात् विशेष स्थिति में रखकर उनके ऊपर प्रेशर डालने के लिए घन या हैमर का प्रहार करते हैं। इससे उनके अणुओं के बीच इन्ट्रा-मोलीकुलर-अट्रैक्शन (intra-molecular-attraction) पैदा हो जाता है तथा वे सदा के लिए जुड़कर वैल्डन जोड़ बनाती हैं। वैल्डन द्वारा चार प्रकार के जोड़ बनाए जाते हैं।

बट जोड़ Butt Joint

जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है, बट जोड़ के सिरे आमने-सामने सीधे जोड़े जाते हैं।

लैप जोड़ Lap Joint

लैप जोड़ बनाने के लिए कार्यखण्डों के सिरों पर अपसैटिंग द्वारा फैलाकर । टेपर कर लिया जाता है; अब उनको पुन: गर्म करके एक-दूसरे पर चढ़ाकर घन या हैमर का प्रहार करते हैं। इससे दोनों सतहों के मध्य उपस्थित स्लैग । बाहर आ जाता है।

V’ जोड़ ‘V’ Joint

‘V’ जोड़ बनाने के लिए एक सिरे को VC आकार का बनाते हैं तथा दूसरे को- तिकोना इस प्रकार बनाते हैं कि दूसरे सिरे-
की ‘V’ में ठीक प्रकार से बैठ जाए।

T’ जोड़ ‘T Joint

दो छड़ों को ‘T आकार में जोड़ने के लिए इस जोड़ का प्रयोग किया जाता है।

फोर्जिंग के लाभ
Advantages of Forging

अन्य मशीनिंग प्रक्रियाओं की तुलना में फोर्जिंग प्रक्रिया के निम्न लाभ हैं

(i) फोर्जिंग प्रक्रिया में धातु का कोई स्क्रैप (scrap) नहीं बनता।

(ii) फोर्जिंग के पश्चात् जॉब की धातु के यान्त्रिक गुणों में विकास होता है।

(iii) फोर्जिंग करने से जॉब की धातु के कणों की आन्तरिक संरचना में सुधार। होता है, जिससे उसकी इलास्टिसिटी (elasticity), टफनेस (toughness) तथा धक्का सहन करने की शक्ति (impact resistanti बढ़ जाती है।

(iv) फोर्जिंग के द्वारा, कोल्ड वर्किंग (cold working) से उत्पन्न दुर्गुण । (defects) समाप्त हो जाते हैं।

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Chapter 6 लौहकारी या फोर्जिंग Blacksmithy or Forging [1]

What is forging in workshop
What is a forge used for?

परिचय Introduction

जी श्री धात को प्लास्टिक अवस्था (plastic stage) तक गर्म करके खान (pressure) डालकर विरूपण (deformation) करने की प्रकिया। सेजिंग (forging) कहते हैं। बड़े आकार के जॉब को डिफॉर्म (deform | करने के लिए पावर हैमर (power hammer), ड्रॉप हेमर (drop hammer) | या फोजिंग मशीन का प्रयोग फोर्जिंग कहलाता है। फोजिंग द्वारा प्राप्त ब्लैंक। Manks) पर कोई भी मशीनिंग प्रक्रिया आसानी से की जा सकती है।।

फोर्ज Forge

लौहकारी या फोर्जिंग शॉप की मुख्य आवश्यकता जॉब को गर्म करने के लिए भट्ठी होती है। ये जॉब के साइज के अनुसार कई मापों में बनाई जा सकती हैं। इस भट्ठी को ही हम फोर्ज कहते हैं।

ईधन Fuels ईंधन किसे कहते हैं

भट्ठी के अन्दर सभी प्रकार के कोयले; जैसे-लकड़ी का कोयला, पत्थर का कोयला, कोक तथा तेल व गैस आदि का प्रयोग किया जाता है, परन्तु सल्फर तथा फॉस्फोरस रहित कोयला अधिक उपयुक्त ईंधन है।

भट्ठी में प्रयुक्त अवयव
Components Used in Forge

फाजिग प्रक्रम को सफतापूर्वक सम्पन्न करने के लिए निम्न अवयव प्रयोग किए जाते हैं।

ब्लोअर Blower

धन को जलाने के लिए आवश्यक हवा भेजने के लिए ब्लोअर का।प्रयोग किया जाता है। हाथ द्वारा चलाने वाला ब्लोअर प्रत्येक भट्ठी में अलग लगाया जाता है जबकि मोटर द्वारा चलने वाला ब्लोअर बड़े साइज का लगाकर पाइपों के द्वारा कई भट्ठियों को हवा सप्लाई करता है।

रेक Rake

भट्ठी में जब कोयला जल रहा होता है, तो उसे जॉब के ऊपर लगाने या वायर के ऊपर ठीक करने की आवश्यकता पड़ती रहती है, इसके लिए एक सरिये का आगे का भाग पीटकर चौड़ा करके 90° पर मोड़ दिया जाता है। इस । औजार को रेक (rake) कहते हैं।

बेलचा Shovel

भट्ठी में जलाने के लिए कोयले को स्टॉक करना पड़ता है। इसे हैण्डिल करने। के लिए बेलचा (shovel) प्रयोग किया जाता है।

पोकर Poker

भट्ठी में कोयला जलाने पर आपस में चिपक जाता है, जिससे हवा बाहर आनी बन्द हो जाती है तथा भट्ठी ठण्डी पड़ने लगती है। ऐसी अवस्था में कोयले को खोलने के लिए एक पतली छड़ को एक सिरे पर नुकीला बनाकर मोड़ दिया जाता है।

फोर्जिंग के औजार
Tools of Forging

भट्ठी के अलावा स्मिथी शॉप में निम्न प्रकार के औजार प्रयोग किए जाते हैं |

एनविल Anvil

स्मिथी शॉप में जॉब पर विभिन्न प्रक्रियाएँ करने के लिए एक विशेष आकृति। (shape) का उपकरण प्रयोग किया जाता है। इसे एनविल (anvil) कहते हैं। इसकी बॉडी माइल्ड स्टील या रॉट आयरन की कास्टिंग द्वारा बनाई जाती है। बाजार में एनविल 50 किग्रा से 300 किग्रा तक के भार में मिलते हैं, परन्तु 150 किग्रा का एनविल ही अधिक प्रयोग में लाया जाता है।

स्वैज ब्लॉक Swage Block

कास्ट आयरन या कास्ट स्टील के द्वारा कास्टिंग करके बनाया गया दूसरा मुख्य तथा उपकरण स्वैज ब्लॉक (swage block) है। इसमें विभिन्न आकार (size) के विभिन्न आकृति (shape) के होल (hole) बने होते हैं। इन छिद्रों की सहायता से गर्म धात को इन छिद्रों पर रखकर पीटने से, किसी भी आकार की वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं। स्वैज ब्लॉक का प्रयोग ड्रिफ्ट (drift) डालने में किया गया है। बाजार में 25 सेमी से 60 सेमी तक के वर्गाकार स्वैज ब्लॉक उपलब्ध हैं।

A swage block (or swager block) is a large, heavy block of cast iron or steel used in smithing, with variously-sized holes in its face and usually with forms on the sides. The through-holes are of ... As with industrial swage blocks, artistic blocks come in many shapes and sizes; common features are hemispherical and ovoid depressions, asymmetrical curves and non-standard angled

सिंडासियाँ Tongs

भट्ठी में गर्म किए गए पार्ट्स को पकड़ने के लिए माइल्ड स्टील की सिंडासी प्रयोग की जाती है। इसको जॉब की आवश्यकता के अनसार विभिन्न क्षमताआ। का बनाया जाता है। साधारणत: ये 1 सेमी से 6 सेमी तक खलने वाली बनाई जाती हैं। जॉब की आकृति (shape) के अनुसार टाँग के जबड़े (jaws)
विभिन्न आकृतियों के बनाए जाते हैं, जिससे उन्हें सफलतापूर्वक पकड़ा जा सके। क्लोज्ड (closed) माउथ, ओपन माउथ, पिक-अप, हॉलो राउण्ड, हॉलो स्क्वायर तथा एंगिल आयरन प्रमुख सिंडासियाँ हैं।

हैमर Hammer

लुहार (blacksmith) के लिए हैमर सबसे अधिक उपयोगी उपकरण है। इसके बीच में एक छेद होता है जिसे आई (eye) कहते हैं। इसमें एक लकड़ी का हत्था (handle) लगाया जाता है। हैमर हत्थे से बाहर न निकले इसके लिए उसमें एक वैज (wedge) लगा दी जाती है। छोटे हैमरों में शीशम की लकड़ी। के हत्थे डालते हैं जबकि बड़े साइज के हैमरों में बाँस की लकड़ी के हत्थे डाले जाते हैं। लौहकारी में हैण्ड हैमर, पीन हैमर, स्लैज हैमर तथा पावर हैमरों का प्रयोग किया जाता है।

छेनियाँ Chisels

लौहकारी में धातुओं को गर्म अवस्था में काटने के लिए गर्म छेनी एवं धातुओं का ठण्डी अवस्था में काटने के लिए ठण्डी छेनी का प्रयोग किया जाता है। गम। अवस्था में धातुएँ अपना सामर्थ्य खोकर प्लास्टिक अवस्था में आ जाती है, जिन्हें आसानी से काटा जा सकता है लेकिन धातओं को ठण्डी अवस्था में काटने के लिए ठण्डी छेनी की कटिंग एज (cutting edge) तेज एवं कठोर होनी आवश्यक है। साथ ही छेनी में सामर्थ्य भी होनी चाहिए, जिससे कि यह जल्दी ब्लन्ट (blunt) न हो जाएँ। वक्र प्रोफाइल (curve profile) काटने के लिए गाल या गेज चीजल (aauge chisel) का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसकी कटिंग एज सीधी ना होकर कुछ वृत्ताकार (वक्र) होती है।

हाथ के बल से कटाई करने के प्रसाधनों में छेनियाँ प्रमुख हैं। सीधी छेनियों को चौरासी ( Firmer chisel) और गोल, अधगोल और J आकार की छेनियों को रुखानी (Gouge) कहते हैं। इनकी नोकें और बनावट भिन्न भिन्न प्रकार की होती है। बढ़ई और फिटरों की छेनियाँ .

स्वैज Swage

लौहकारी में जब वर्गाकार, वृत्ताकार या अष्टभुजाकार या अन्य किसी प्रोफाइल के अनुप्रस्थ काट वाले जॉब बनाए जाते हैं, तो वे हैमर की चोट पड़ने के कारण रफ हो जाते हैं। इस सतह को परिष्कृत करने के लिए तथा सही साइज प्रदान करने के लिए स्वैज का प्रयोग किया जाता है। स्वैज एक प्रकार से स्पलिट डाई के समान बना होता है। इसके दो भाग होते हैं लोअर या बॉटम और अपर या टॉप स्वैज।

फुलर Fuller

फलर का प्रयोग किसी जॉब की मोटाई को घटाने के लिए तथा लम्बाई बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह भी दो पीस में बना होता है। एक पीस को एनविल के हार्डी होल में फिट कर देते हैं तथा दूसरे पीस को जॉब के ऊपर रखकर। उसके ऊपर घन की चोट मारते हैं। नीचे वाल पीस को बॉटम फलर – fuller) तथा ऊपर वाले पीस को टॉप फुलर (top fuller) कहते हैं।

फ्लैटर Flatter

जॉब की सतह को ऊपर से फिनिश करने के लिए फ्लेटर का प्रयोग जाता है। यह टल स्टील (tool steel) स बनाया जाता है। यह एक साल तरह का उपकरण है, जिसमें आई बनी होती है तथा उसमें एक कर दिया जाता है। इसके नीचे का भाग फैला हुआ तथा फ्लैट होता है। इसके नीचे की फ्लैट सतह 5 सेमी से 7.5 सेमी वर्गाकार होती है।।

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Chapter 5 Fitter thoery सही विकल्प चयन कीजिय [4]

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Chapter 1 Fitter thoery ट्रेड परिचय एवं सुरक्षा सावधानियाँ [1]
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Chapter 1 Fitter thoery सही विकल्प का चयन कीजिये [3]
Chapter 1 Fitter thoery सही विकल्प का चयन कीजिये [4]

CHAPTER 2 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
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Chapter 2 Fitter theory सही विकल्प चयन कीजिय [3]
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CHAPTER 3 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
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CHAPTER 4 Fitter thoery सामान्य हस्त औजार एवं ‘की। [1]
CHAPTER 4 Fitter thoery सामान्य हस्त औजार एवं ‘की। [2]

CHAPTER 4 Fitter thoery सामान्य हस्त औजार एवं ‘की। [3]
CHAPTER 4 Fitter thoery सही विकल्प चयन कीजिय [4]
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CHAPTER 5 FITTER THOERY धातुओं के गुणधर्म बनावट [1]
Chapter 5 धातुओं का वर्गीकरण Classification of Metals [2]
Chapter 5 Fitter thoery सही विकल्प चयन कीजिय [3]
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Chapter 5 Fitter thoery सही विकल्प चयन कीजिय [3]

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Chapter 1 Fitter thoery ट्रेड परिचय एवं सुरक्षा सावधानियाँ [1]
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CHAPTER 2 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
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CHAPTER 3 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
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Chapter 5 धातुओं का वर्गीकरण Classification of Metals [2]

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CHAPTER 3 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
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ITI Fitter Theory Exam Paper In Hindi – जब आप किसी भी परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको सबसे पहले उस परीक्षा का पैटर्न उसका सिलेबस पता होना बहुत ही जरूरी है ताकि आप कम से कम समय में भी उसकी अच्छी तैयारी कर पाए जो भी उम्मीदवार ITI Fitter की परीक्षा की तैयारी कर रहा है उसके लिए इस पोस्ट में ITI Fitter परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस के अनुसार टेस्ट दिया गया है जिसे हल करके आप अपनी तैयारी को काफी बेहतर बना सकते हैं .ITI Fitter की तैयारी करने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए हमारी वेबसाइट पर और भी काफी ऑनलाइन प्रैक्टिस सेट दिए हैं जिन्हें हल करके वह अपनी तैयारी को अच्छी कर सकते हैं.

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Chapter 1 Fitter thoery ट्रेड परिचय एवं सुरक्षा सावधानियाँ [1]
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रेतियाँ Files वर्गीकरण Classification विशेष रेतियाँ Special Files रेताई Filing हैक्सॉ Hacksaw

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CHAPTER 4 सामान्य हस्त औजार एवं ‘की। [2]

ITI Fitter Theory Exam Paper In Hindi – जब आप किसी भी परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको सबसे पहले उस परीक्षा का पैटर्न उसका सिलेबस पता होना बहुत ही जरूरी है ताकि आप कम से कम समय में भी उसकी अच्छी तैयारी कर पाए जो भी उम्मीदवार ITI Fitter की परीक्षा की तैयारी कर रहा है उसके लिए इस पोस्ट में ITI Fitter परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस के अनुसार टेस्ट दिया गया है जिसे हल करके आप अपनी तैयारी को काफी बेहतर बना सकते हैं .ITI Fitter की तैयारी करने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए हमारी वेबसाइट पर और भी काफी ऑनलाइन प्रैक्टिस सेट दिए हैं जिन्हें हल करके वह अपनी तैयारी को अच्छी कर सकते हैं.

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Chapter 1 Fitter thoery ट्रेड परिचय एवं सुरक्षा सावधानियाँ [1]
Chapter 1 Fitter thoery ट्रेड परिचय एवं सुरक्षा सावधानियाँ [2]
Chapter 1 Fitter thoery सही विकल्प का चयन कीजिये [3]
Chapter 1 Fitter thoery सही विकल्प का चयन कीजिये [4]

CHAPTER 2 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
CHAPTER 2 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [2]
Chapter 2 Fitter theory सही विकल्प चयन कीजिय [3]
Chapter 2 Fitter theory सही विकल्प चयन कीजिय [4]
Chapter 2 Fitter theory सही विकल्प चयन कीजिय [5]

CHAPTER 3 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [1]
CHAPTER 3 FITTER THOERY चिन्हन एवं चिन्हन औजार [2]
CHAPTER 3 Fitter theory सही विकल्प चयन कीजिय [3]

CHAPTER 4 Fitter thoery सामान्य हस्त औजार एवं ‘की। [1]