Class 10 Social Science

Class 10 Social Science Chapter 9 (Section 1)

Class 10 Social Science Chapter 9 (Section 1)

BoardUP Board
TextbookNCERT
ClassClass 10
SubjectSocial Science
ChapterChapter 9
Chapter Nameद्वितीय विश्वयुद्ध-कारण तथा परिणाम
CategorySocial Science
Site Nameupboardmaster.com

UP Board Master for Class 10 Social Science Chapter 9 द्वितीय विश्वयुद्ध-कारण तथा परिणाम (अनुभाग – एक)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
            या
द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख कारण क्या थे ? इसका तात्कालिक प्रभाव क्या पड़ा ?
            या
द्वितीय विश्वयुद्ध के चार प्रमुख कारण बताइट।
            या
द्वितीय विश्वयुद्ध के कारणों तथा परिणामों पर प्रकाश डालिए।
            या
द्वितीय विश्वयुद्ध के किन्हीं तीन कारणों का उल्लेख कीजिए जो आपकी दृष्टि से अधिक प्रभावकारी थे।
            या
द्वितीय विश्वयुद्ध कब हुआ? इसका तात्कालिक कारण क्या था?
            या
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारम्भ 1 सितम्बर, (UPBoardmaster.com) 1939 को हुआ।

द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख कारण

द्वितीय विश्वयुद्ध के विस्फोट के लिए भी वही कारण उत्तरदायी थे, जो प्रथम विश्वयुद्ध के लिए थे; यथा-धुरी राष्ट्रों की आक्रामक नीति तथा इंग्लैण्ड और फ्रांस की तुष्टीकरण व स्वार्थपूर्ण नीति। संक्षेप में, इस युद्ध के लिए निम्नलिखित कारणों को उत्तरदायी माना जाता है

1. वर्साय की सन्धि में जर्मनी का अपमान – वर्साय की सन्धि ही द्वितीय विश्वयुद्ध का मूल कारण थी। यह वास्तविक अर्थों में शान्ति सन्धि नहीं थी, वरन् इसमें दूसरे विश्वयुद्ध के बीज छिपे हुए थे। इस सन्धि में जर्मनी का बड़ा ही अपमान किया गया तथा जर्मन प्रतिनिधियों को बलपूर्वक सन्धि-पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य किया गया था। जर्मनी के सारे साम्राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया गया था। उसकी सैनिक तथा (UPBoardmaster.com) समुद्री शक्ति को नष्ट कर दिया गया था। उसकी राष्ट्रीय भावनाओं को इतना कुचल दिया गया था कि जर्मन जनता अपने अपमान का बदला लेने के लिए बेचैन हो उठी थी। दूसरी ओर इटली भी इस सन्धि से असन्तुष्ट था। वह भी फ्रांस और इंग्लैण्ड से बदला लेने के इन्तजार में था। ऑस्ट्रिया और टर्की भी इस सन्धि से रुष्ट थे।

2. हिटलर का उत्थान – जर्मनी के सम्राट कैसर विलियम द्वितीय के पतन के बाद जर्मनी में गणराज्य की स्थापना हुई थी। लेकिन वीमर गणतन्त्र की सरकार जर्मनी में बढ़ती हुई बेकारी, भुखमरी तथा अराजकता को रोकने में विफल रही। इस सरकार ने वर्साय सन्धि को स्वीकार करके जर्मन जनता की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचायी। जर्मनी की आन्तरिक दशा का लाभ उठाकर हिटलर ने नाजी पार्टी की स्थापना की और जनता के समक्ष जोरदार शब्दों में घोषणा की कि नाजी पार्टी जर्मनी को पुनरुत्थान करेगी तथा वर्साय में हुए जर्मनी के अपमान का बदला लेगी।

3. साम्राज्यवादी भावना का विकास – साम्राज्यवादी भावना का विकास भी द्वितीय महायुद्ध का एक मुख्य कारण था। यूरोप के बहुत-से राष्ट्र सैनिक दृष्टि से सबल होते हुए भी साम्राज्य की दृष्टि से अपने को हीन समझते थे। जर्मनी, इटली और जापान का स्थान ऐसे ही राष्ट्रों में था। ये राष्ट्र सैन्य-शक्ति की दृष्टि से ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस आदि देशों से किसी भी प्रकार कम नहीं थे, किन्तु उनके पास इंग्लैण्ड व फ्रांस के समान विशाल साम्राज्य नहीं थे; अतः साम्राज्य–विस्तार की भावना उनके हृदय में निरन्तर बढ़ती जा रही थी। ऐसी स्थिति में युद्ध का छिड़ना अनिवार्य था।

4. राष्ट्र संघ की दुर्बलता – द्वितीय विश्वयुद्ध का एक महत्त्वपूर्ण कारण राष्ट्र संघ की असफलता थी। जर्मनी, जापान तथा इटली ने अपनी इच्छानुसार ऑस्ट्रिया, मंचूरिया और अबीसीनिया पर विजय प्राप्त की। निर्बल राष्ट्रों ने राष्ट्र संघ से अपनी सुरक्षा की प्रार्थना की। उसकी उदासीनता तथा दुर्बलता को देखकर विश्व के राष्ट्र अपने-अपने बचाव के लिए सैनिक तैयारियाँ करने लगे।

5. विभिन्न गुटबन्दियाँ – हिटलर की आक्रामक कार्यवाहियों को देखकर यूरोप के राष्ट्रों में खलबली मच गयी। सभी राष्ट्र अपनी-अपनी सुरक्षा करने के लिए गुटबन्दियाँ करने लगे। इन गुटबन्दियों में विचित्र बात यह थी कि एक ही राष्ट्र कई गुटों में सम्मिलित हो जाता था। सबसे पहले फ्रांस, रूस, पोलैण्ड, चेकोस्लोवाकिया, रूमानिया और यूगोस्लाविया ने अपना गुट बनाया। इसके बाद जर्मनी, इटली और जापान में गुटबन्दी हो गयी। इस प्रकार यूरोप (UPBoardmaster.com) के प्रमुख राष्ट्र दो गुटों में बँट गये। इन गुटबन्दियों का फल यह हुआ कि विश्व के सभी राष्ट्र एक-दूसरे को अविश्वास और शंका की दृष्टि से देखने लगे।

6. तुष्टीकरण की नीति – द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व ब्रिटेन तथा फ्रांस ने फासीवादी शक्तियों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनायी। सन् 1931 ई० से 1938 ई० के मध्य जापान ने मंचूरिया, इटली ने अबीसीनिया और जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को हड़प लिया, किन्तु यूरोपीय देशों और अमेरिका ने उनका कोई प्रतिरोध नहीं किया। म्यूनिख समझौते में तुष्टीकरण की नीति पराकाष्ठा पर जा पहुँची, जबकि ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री चैम्बरलेन तथा फ्रांस के प्रधानमन्त्री दलादियर ने चेकोस्लोवाकिया की बलि दे दी। साम्यवाद को रोकने के लिए अपनायी गयी तुष्टीकरण की नीति आगे चलकर विश्वयुद्ध का एक कारण बन गयी।

7. पोलैण्ड की समस्या तथा युद्ध का आरम्भ अथवा तत्कालीन कारण – पेरिस के शान्ति सम्मेलन के निर्णय के अनुसार पोलैण्ड को एक स्वतन्त्र राज्य बना दिया गया था और वहाँ पर लोकतन्त्र की स्थापना की गयी थी। पोलैण्ड को समुद्र तट से मिलाने के लिए जर्मनी के बीच से होकर एक मार्ग बना दिया गया था। यह पोलिश गलियारा डेन्जिग के बन्दरगाह तक जाता था। हिटलर का कहना था कि डेन्जिंग में जर्मन जाति के लोग निवास करते हैं; अत: डेन्जिंग पर जर्मनी का अधिकार होना चाहिए। हिटलर की इस बात को मानने के लिए पोलैण्ड तैयार नहीं था। जर्मन सेनाओं ने 1 सितम्बर, 1939 ई० को पोलैण्ड पर आक्रमण (UPBoardmaster.com) कर दिया। पोलैण्ड की सुरक्षा का आश्वासन देने के कारण ब्रिटेन, सभी ब्रिटिश उपनिवेश तथा फ्रांस ने भी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर डाली। इस प्रकार द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हो गया।

8. युद्ध की अनिवार्यता – वास्तव में प्रथम विश्वयुद्ध तथा उसके बाद की परिस्थितियों ने द्वितीय विश्वयुद्ध को अनिवार्य बना दिया था। कुछ राष्ट्रों ने इसे रोकने का प्रयास भी किया, किन्तु अन्य राष्ट्र ‘यह समझते थे कि वे युद्ध से भयभीत हो गये हैं; अत: उनके लिए साम्राज्य–विस्तार का यह एक अच्छा अवसर है। इसीलिए साम्राज्यवादी देशों ने अन्य राज्यों को अपने साम्राज्य में मिलाना प्रारम्भ कर दिया। इस प्रकार साम्राज्य–विस्तार की नीति तथा शस्त्रीकरण ने द्वितीय विश्वयुद्ध को अनिवार्य बना दिया। [संकेत–परिणामों (प्रभाव) के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 का उत्तर देखें।

प्रश्न 2
द्वितीय विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :

द्वितीय विश्वयुद्ध की प्रमुख घटनाएँ

द्वितीय विश्वयुद्ध 1 सितम्बर, 1939 ई० को प्रारम्भ हुआ, जिसकी शुरुआत जर्मनी ने पोलैण्ड पर आक्रमण करके की और 14 अगस्त, 1945 ई० को जापान के आत्मसमर्पण के साथ ही समाप्त हो गया। इस महायुद्ध की उल्लेखनीय घटनाएँ निम्नलिखित रहीं–

1. पोलैण्ड का युद्ध – 1 सितम्बर, 1939 ई० की सुबह 5 बजे जर्मनी की सेनाओं ने पोलैण्ड पर आक्रमण कर दिया।

2. रूस का फिनलैण्ड पर आक्रमण – पूर्वी पोलैण्ड पर प्रभुत्व जमाने के बाद सोवियत रूस की सेनाओं ने 20 नवम्बर, 1939 ई० को फिनलैण्ड पर आक्रमण किया। भीषण युद्ध के बाद फिनलैण्ड की सेना ने हथियार डाल दिये और उस पर (UPBoardmaster.com) रूस का अधिकार हो गया।

3. हिटलर का नार्वे तथा डेनमार्क पर आक्रमण – 9 अप्रैल, 1940 ई० की सुबह अचानक ही हिटलर ने जर्मन सेनाओं को नार्वे और डेनमार्क पर हमला करने का आदेश दे दिया। 8 जून, 1940 ई० को नार्वे के महत्त्वपूर्ण नगर जर्मनी के अधिकार में आ गये।

4. हॉलैण्ड और बेल्जियम का फ्तन – 10 मई, 1940 ई० को जर्मनी ने हॉलैण्ड पर आक्रमण किया। 14 मई, 1940 ई० को डच सेनाओं ने हथियार डाल दिये। हॉलैण्ड पर जर्मनी का अधिकार हो गया।

5. फ्रांस की पराजय – हिटलर का लक्ष्य फ्रांस से जर्मनी के अपमान का बदला लेना था। अत: उसने जर्मन सेनाओं को तीन दिशाओं से फ्रांस पर आक्रमण करने का आदेश दे दिया। 22 जून, 1940 ई० को फ्रांस ने हार मान ली।

6. ब्रिटेन पर हवाई आक्रमण – जर्मनी की जलशक्ति इंग्लैण्ड की जलशक्ति की अपेक्षा निर्बल थी। इस कारण हिटलर ने 8 अगस्त, 1940 ई० को इंग्लैण्ड पर बमबारी करने के आदेश दे दिये। लेकिन ब्रिटेन के वायुयानों ने लगभग 2,500 जर्मन वायुयानों को नष्ट कर दिया।

7. जर्मनी का रूस पर आक्रमण – जर्मनी रूस का प्रबल शत्रु था। हिटलर भी रूस के उपजाऊ क्षेत्र यूक्रेन की खानों तथा तेल के कुओं पर अधिकार करना चाहता था। 22 जून, 1941 ई० को हिटलर ने जर्मन सेनाओं को रूस पर तीन दिशाओं से आक्रमण करने का आदेश दे दिया। जर्मन सेना ने यूक्रेन पर जल्दी ही अधिकार कर लिया, किन्तु लेनिनग्राड और मास्को पर अधिकार करने में असफल रही।

8. जापान तथा अमेरिका का युद्ध में प्रवेश – 7 दिसम्बर, 1941 ई० को अचानक ही जापानी सेना ने अमेरिका के प्रशान्त महासागर स्थित नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर भयानक आक्रमण कर दिया। जापान के इस आकस्मिक आक्रमण से (UPBoardmaster.com) अमेरिका का नौसैनिक अड्डा पूरी तरह नष्ट हो गया। इसी दिन जापानी सेना ने शंघाई, हांगकांग, मलाया और सिंगापुर पर बमवर्षा की और ब्रिटिश जंगी जहाज ‘प्रिन्स ऑफ वेल्स’ को बमबारी करके नष्ट कर दिया। 11 दिसम्बर, 1941 ई० को संयुक्त राज्य अमेरिका ने धुरी राष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

9. धुरी राष्ट्रों की पराजय का आरम्भ – अमेरिका के युद्ध में कूद पड़ने से मित्रराष्ट्रों की शक्ति तथा उत्साह बहुत अधिक बढ़ गया। जून, 1943 ई० में मित्रराष्ट्रों ने जापानी जहाजी बेड़े को मिडवे द्वीपसमूह के युद्ध में पराजित कर दिया। अगस्त, 1942 ई० में अमेरिका ने सोलोमन द्वीप-समूह पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया।

10. मित्रराष्ट्रों की घेराबन्दी – 14 जनवरी, 1943 ई० को ब्रिटिश प्रधानमन्त्री चर्चिल और अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने कासा ब्लांका में एक गुप्त सम्मेलन किया, जिसमें जर्मनी और इटली की घेराबन्दी की योजना बनायी गयी।

11. इटली की पराजय – 10 जुलाई, 1943 ई० को मित्रराष्ट्रों की सेनाओं ने सिसली पर आक्रमण किया। शीघ्र ही सिसली मित्रराष्ट्रों के अधिकार में आ गया। 18 जुलाई, 1943 ई० को मित्रराष्ट्रों ने संगठित रूप से इटली पर आक्रमण कर दिया।

12. फ्रांस की स्वतन्त्रता – 5 जून, 1944 ई० से मित्रराष्ट्रों ने फ्रांस की मुक्ति का अभियान छेड़ दिया। 15 अगस्त, 1944 ई० को फ्रांस के पूर्व भूमध्यसागरीय तट पर मित्रराष्ट्रों की सेनाएँ पहुँच गयीं। शीघ्र ही तूलो तथा मारसेलीज के बन्दरगाहों पर मित्रराष्ट्रों का प्रभुत्व स्थापित हो गया।

13. जर्मनी की पराजय – नवम्बर, 1944 ई० में मित्रराष्ट्रों की सेनाएँ हॉलैण्ड के मार्ग से जर्मनी में प्रविष्ट हो गयीं। हिटलर के नेतृत्व में जर्मन सेनाओं ने शत्रुओं का जमकर सामना किया, परन्तु अब तक की पराजयों से जर्मनों की शक्ति क्षीण हो चुकी थी। अतः जर्मन सेनाएँ हारकर पीछे हटने लगीं। 4 मई, 1945 ई० को समस्त यूरोप में जर्मन सेनाओं ने हथियार डाल दिये। 7 मई, 1945 ई० को अन्तरिम जर्मन सरकार ने युद्ध विराम सन्धि पर (UPBoardmaster.com) हस्ताक्षर कर दिये और 8 मई, 1945 ई० को सम्पूर्ण यूरोप में युद्ध बन्द हो गया।

14. जापान की पराजय – 26 जुलाई, 1945 ई० को पोट्सडम सम्मेलन में मित्रराष्ट्रों ने जापान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की माँग की, परन्तु जापान ने उनकी माँग पर कोई ध्यान न देकर युद्ध जारी रखा। फलस्वरूप 6 अगस्त, 1945 ई० को अमेरिका ने जापान के समृद्ध नगर हिरोशिमा पर पहला अणु बम डाल दिया। 9 अगस्त, 1945 ई० को अमेरिका ने जापानी नगर नागासाकी पर अपना दूसरा अणु बम गिराया। इन बमों की भयानक तबाही को देखकर जापान का सम्राट बुरी तरह भयभीत हो गया और उसने तत्काल ही जापानी सेना को हथियार डालने का आदेश दिया।

प्रश्न 3.
द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणामों का विवेचन कीजिए।
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध के क्या परिणाम हुए? किन्हीं चार पर प्रकाश डालिए।
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध के दो परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रमुख परिणाम

द्वितीय विश्वयुद्ध के अग्रलिखित परिणाम हुए –

1. भयंकर विनाश और नरसंहार – इस युद्ध में 5 करोड़ से भी अधिक लोग मारे गये। करोड़ों लोग घायल व बेघर हो गये। लगभग एक करोड़ बीस लाख लोगों को तो जर्मनी व इटली के यन्त्रणा शिविरों में अपनी जान गॅवानी पड़ी। इस युद्ध में सबसे (UPBoardmaster.com) अधिक हानि जर्मनी में रूस को उठानी पड़ी। इसके अतिरिक्त पोलैण्ड तथा चेकोस्लोवाकिया में शायद ही कोई गाँव बचा हो जो युद्ध में नष्ट न हुआ हो। फ्रांस, बेल्जियम, हॉलैण्ड आदि राष्ट्रों में असंख्य लोग भूख से तड़प-तड़पकर मर गये थे।

2. आर्थिक परिणाम – यूरोप के अनेक राष्ट्रों ने अपने साधनों को युद्ध में लगा दिया था, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी। इस युद्ध में संलग्न सभी राष्ट्रों द्वारा लगभग 15 खरब डॉलर व्यय किये गये। युद्ध के बाद अनेक देशों की कीमतों में तीव्रता से वृद्धि हुई, जिससे मुनाफाखोरी तथा चोरबाजारी को बढ़ावा मिला। साथ ही बेरोजगारी भी बढ़ी।

3. जर्मनी का विभाजन – इस युद्ध में जर्मनी की पराजय होने पर मित्रराष्ट्रों द्वारा उसे दो भागों में विभाजित कर दिया गया-पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी। पूर्वी जर्मनी पर रूस का अधिकार हो गया, जब कि पश्चिमी जर्मनी पर अमेरिका, फ्रांस व इंग्लैण्ड का प्रभुत्व रहा।

4. फासिस्टवाद का अन्त – इटली से फासीवाद का अन्त हो गया। वहाँ प्रजातन्त्र की स्थापना हुई। युद्ध के हर्जाने के रूप में उसे अत्यधिक धनराशि देनी पड़ी। इटली के अफ्रीकी उपनिवेश उसके अधिकार से छिन गये।

5. साम्राज्यवाद में निरन्तर कमी – ब्रिटेन, फ्रांस, हॉलैण्ड, पुर्तगाल, इटली, बेल्जियम आदि देशों ने एशिया और अफ्रीका के अनेक देशों में अपने उपनिवेश स्थापित किये हुए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणामस्वरूप पराधीन देशों में राष्ट्रीयता तथा देशभक्ति की भावनाओं को बढ़ावा मिला, जिससे वहाँ स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष व आन्दोलन प्रारम्भ हो गये।

6. साम्यवाद का प्रसार – द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् विश्व में साम्यवाद का प्रसार बड़ी तेजी से हुआ। रूस के प्रभाव के कारण यूरोप में हंगरी, रूमानिया, पोलैण्ड, बुल्गारिया, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया तथा पूर्वी जर्मनी में साम्यवादी सरकारों की स्थापना हुई।

7. दो गुटों का निर्माण एवं शीत युद्ध का जन्म – द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व के अनेक राष्ट्र दो गुटों में बँट गये-पूँजीवादी तथा साम्यवादी। पूँजीवादी देशों का नेतृत्व अमेरिका, जबकि साम्यवादी देशों का नेतृत्व रूस के हाथों में था। यद्यपि द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका तथा रूस दोनों ने मिलकर : जर्मनी के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी, किन्तु युद्ध के बाद साम्यवाद के प्रसार के कारणों से अमेरिका तथा रूस में गम्भीर मतभेद उत्पन्न हो गये। (UPBoardmaster.com) रूस की बढ़ती हुई शक्ति से चिन्तित होकर अमेरिका तथा कुछ अन्य राष्ट्रों ने नाटो, सीटो तथा सेण्टो नामक सैनिक गुटबन्दियों का निर्माण किया।

8. अस्त्र-शस्त्र के निर्माण में होड़ – द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद आणविक अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण का एक नया युग. प्रारम्भ हो गया। अमेरिका, रूस, फ्रांस, इंग्लैण्ड आदि राष्ट्र अपनी सुरक्षा को मजबूत करने हेतु विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण में लग गये। अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में पुन: तनाव फैलाना शुरू कर दिया है, जिसके कारण आज विश्व तीसरे विश्वयुद्ध के कगार पर खड़ा प्रतीत हो रहा है।

9. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना – द्वितीय विश्वयुद्ध की विनाश-लीला को देखकर भविष्य में युद्धों को रोकने, अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को शान्तिपूर्ण ढंग से हल करने तथा विश्व में सहयोग एवं मैत्री स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न राष्ट्रों ने मिलकर 24 अक्टूबर, 1945 ई० को संयुक्त राष्ट्र संघ’ नामक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की। यह संस्था आज भी विश्व में शान्ति तथा मानव-जाति की सुरक्षा के लिए प्रयत्नशील है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्वितीय विश्वयुद्ध कब और क्यों शुरू हुआ ?
उत्तर :
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद की गयी वर्साय की सन्धि के द्वारा मित्रराष्ट्रों (इंग्लैण्ड, फ्रांस के रूस) ने पराजित राष्ट्रों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी व तुर्की) के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया। जर्मनी को प्रथम विश्वयुद्ध का दोषी ठहराकर उसे शक्तिहीन बना दिया गया। (UPBoardmaster.com) इससे जर्मनी में बदला लेने की भावना उत्पन्न हो गयी। धीरे-धीरे अपनी शक्ति को संचित करके, जर्मनी ने 1 सितम्बर, 1939 ई० को पोलैण्ड पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया। फ्रांस, व इंग्लैण्ड ने जर्मनी को पोलैण्ड से अपनी सेना वापस बुलाने की चेतावनी दी, जिसे जर्मनी ने अनसुना कर दिया। इस पर इंग्लैण्ड और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इटली व जापान ने जर्मनी का साथ दिया। इस प्रकार 1 सितम्बर, 1939 ई० को द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हो गया।

प्रश्न 2.
उन देशों के नाम लिखिए जो द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़े थे।
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्रराष्ट्रों के नाम बताइए
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध में सम्मिलित होने वाले देशों की एक सूची बनायी जाने वाली है। उस सूची में एशिया के किस देश का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध धुरी राष्ट्रों (जर्मनी, इटली और जापान) (UPBoardmaster.com) और मित्रराष्ट्रों (फ्रांस, रूस, अमेरिका आदि) के बीच लड़ा गया था।

इस सूची में एशिया महाद्वीप के जापान देश का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

प्रश्न 3.
तुष्टीकरण की नीति से क्या अभिप्राय है? यह द्वितीय विश्वयुद्धका कारण कैसे बनी ?
उत्तर :
तुष्टीकरण से अभिप्राय है, किसी के आक्रमण को मूक मान्यता देना अथवा किसी आक्रामक शक्ति को मनाने के लिए किसी अन्य देश की बलि दे देना। आक्रामक शक्तियों की निन्दा करने की अपेक्षा पश्चिमी देशों ने ऐसी शक्तियों के प्रति तुष्टीकरण की नीति अपनायी। इसी तुष्टीकरण की नीति के कारण विश्व को एक अन्य युद्ध झेलना पड़ा। इस तथ्य के निम्नलिखित प्रमाण दिये जा सकते हैं

1. तत्कालीन यूरोप में दो बड़े खतरे थे—फासीवाद से और साम्यवाद से। युद्धकालीन साम्यवाद ने पश्चिमी यूरोपीय देशों को आतंकित कर रखा था। उन्हें यह भी भय था कि कहीं उनके देश में मजदूर स्वयं को संगठित करके सामाजिक क्रान्ति न कर दें। पश्चिमी देशों ने फासीवाद को तो सहन कर लिया, परन्तु मजदूरों के समर्थक साम्यवादी देश रूस का विरोध किया। जब जापान, इटली तथा जर्मनी ने कोमिण्टर्न विरोधी गठबन्धन स्थापित किया तो पश्चिमी देशों ने राहत का अनुभव किया, किन्तु यह उनकी भूल थी। उन्हें धुरी शक्तियों को उसी समय दबा देना चाहिए था।

2. पश्चिमी देशों ने दूरदर्शिता से काम नहीं लिया। उन्हें प्रथम महायुद्ध में पराजित जर्मनी तथा इटली से सावधान रहना चाहिए था। सन् 1936 ई० में जर्मनी ने वर्साय सन्धि की शर्तों को भंग करते हुए जब राइनलैण्ड में प्रवेश किया तब उसे रोकने के लिए पश्चिमी देशों के द्वारा कुछ नहीं किया गया।

3. जापान ने जब चीन पर आक्रमण किया तो ब्रिटेन और फ्रांस ने राष्ट्र संघ के कहने पर भी उसके विरुद्ध प्रतिबन्धों पर कोई विचार नहीं किया। सन् 1933 ई० में जापान राष्ट्र संघ से अलग हो गया। उसने चीन में अमेरिका तथा ब्रिटेन की (UPBoardmaster.com) सम्पत्ति भी जब्त कर ली, फिर भी इन देशों की तुष्टीकरण की नीति जारी रही।

4. सन् 1935 ई० में इटली ने इथोपिया पर आक्रमण किया। राष्ट्र संघ ने इटली की कड़ी आलोचना की तथा उसके विरुद्ध आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने की भी बात कही, किन्तु फ्रांस, इंग्लैण्ड और अमेरिका ने इटली को दण्ड देने के लिए कुछ नहीं किया।

5. सन् 1936 ई० में स्पेन में गृहयुद्ध छिड़ गया था। वहाँ सेना ने जनरल फ्रांको के नेतृत्व में लोकतान्त्रिक मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंका। अन्य फासिस्ट देशों ने भी जनरल फ्रांको की सहायता की, तब ब्रिटेन और फ्रांस ने वहाँ की संवैधानिक सरकार को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया।

6. सन् 1938 ई० में जर्मनी ने चेकोस्लोवाकिया के सुदेतेनलैण्ड क्षेत्र पर अपना दावा किया, तब फ्रांस और इंग्लैण्ड के प्रधानमन्त्रियों ने म्यूनिख समझौते के तहत हिटलर की शर्तों को मान लिया। सन् 1939 ई० में जर्मनी ने सम्पूर्ण चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया। पश्चिमी देशों की तुष्टीकरण की नीति ने फासिस्ट शक्तियों को बल प्रदान किया। यदि फासिस्टों पर रोक लगा दी जाती तो सम्भव था कि द्वितीय विश्वयुद्ध टल जाता।

प्रश्न 4.
द्वितीय विश्वयुद्ध कब और कैसे समाप्त हो गया ?
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध श्रेष्ठ हथियारों का युद्ध था, जिसका अन्त सर्वाधिक विनाशकारी हथियार के आविष्कार द्वारा हुआ। स्पष्ट कीजिए।
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध कब समाप्त हुआ ? इसमें किसकी पराजय हुई ?
उतर :
सन् 1942 ई० से ही जर्मनी रूस के साथ एक निर्णायक तथा विनाशकारी युद्ध में संलग्न था। सन् 1944 ई० में फ्रांस के नॉर्मण्डी तट पर अमेरिकी तथा ब्रिटिश सेनाएँ उतर पड़ीं तो जर्मनी के लिए दूसरा गोर्चा खुल गया। मित्रराष्ट्रों की सेनाओं ने (UPBoardmaster.com) जर्मनी को सब ओर से घेर लिया। जब 2 मई, 1945 ई० को मित्र देशों की सेनाओं ने बर्लिन में प्रवेश किया तो हिटलर ने आत्महत्या कर ली। इसके साथ ही जर्मनी ने बिना शर्त के 7 मई, 1945 ई० को आत्मसमर्पण कर दिया तथा यूरोप से युद्ध का अन्त हो गया, किन्तु एशिया में अगस्त, 1945 ई० तक युद्ध जारी रहा। 6 तथा 9 अगस्त, 1945 ई० को क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी नगरों पर अमेरिका द्वारा लिटिल बॉय और फैट मैन नामक बम गिराने से हुई भारी क्षति के कारण जापान ने 14 अगस्त को आत्मसमर्पण कर दिया। इस प्रकार द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया।

प्रश्न 5.
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की पराजय क्यों हुई? इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
द्वितीय विश्व युद्ध के अन्तिम चरण में अमेरिका ने जापान के दो नगरों हिरोशिमा और नागासाकी पर 6 अगस्त, 1945 ई० को परमाणु बम गिराए। परमाणु बमों द्वारा किए गए जन-धन के इस महाविनाश ने जापान को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया। इस प्रकार 14 अगस्त, 1945 ई० को जापान पराजित हो गया। इसका प्रभाव यह पड़ा कि जापान की बढ़ती सैन्य क्षमता पर विराम लग गया तथा उसे विपरीत परिस्थितियों में आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा और इसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध का भी अन्त हो गया।

प्रश्न 6.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान तथा उसके सहयोगी देशों के विरुद्ध युद्ध में सम्मिलित होने का निर्णय क्यों लिया ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ?
          या
“सन् 1941 में यदि जापान ने पर्ल हार्बर पर आक्रमण न किया होता तो एक शक्तिशाली राष्ट्र युद्ध में न कूद पड़ता।” यह किस राष्ट्र के विषय में कहा गया है? उसने किन राष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध घोषित किया ?
          या
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वितीय विश्वयुद्ध में क्यों सम्मिलित हो गया ?
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका मित्रराष्ट्रों के पक्ष में क्यों सम्मिलित हुआ ?
उत्तर :
जर्मनी ने पोलैण्डे पर आक्रमण करके द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत की थी। अमेरिका मित्रराष्ट्रों के प्रति सहानुभूति रखता था, इसके बावजूद वह युद्ध में सम्मिलित नहीं हुआ। जापान, जर्मनी के पक्ष में युद्ध में सम्मिलित हो चुका था। उसने 7 दिसम्बर, 1941 ई० को अचानक ही अमेरिका के प्रशान्त महासागर स्थित नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर नामक बन्दरगाह पर आक्रमण कर दिया तथा अमेरिका के 20 युद्धपोतों और 250 विमानों को (UPBoardmaster.com) नष्ट कर दिया। परिणामस्वरूप अमेरिका भी 11 दिसम्बर, 1941 ई० को द्वितीय विश्वयुद्ध में कूद पड़ा तथा उसने धुरी राष्ट्रों जापान, इटली व जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। युद्ध में अमेरिका के आ जाने से मित्रराष्ट्रों की शक्ति बढ़ गयी और उनकी धुरी राष्ट्रों के विरुद्ध जो सतत पराजय हो रही थी वह क्रमशः विजय में परिवर्तित होने लगी।

प्रश्न 7.
द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम अत्यन्त विनाशकारी थे। भविष्य में ऐसे युद्धों को रोकने के लिए दो सुझाव दीजिए।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध कितना विनाशकारी था, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गये, करोड़ों लोग घायल व बेकार हो गये। लगभग 1 करोड़ 20 लाख लोगों को तो जर्मनी व इटली के यन्त्रणा शिविरों में अपनी जान गॅवानी पड़ी। इस युद्ध में सबसे अधिक हानि जर्मनी व रूस को उठानी पड़ी। इनके अतिरिक्त पोलैण्ड तथा चेकोस्लोवाकिया में शायद ही कोई गाँव बचा हो, जो युद्ध में नष्ट न हुआ हो। फ्रांस, हॉलैण्ड, बेल्जियम आदि राष्ट्रों में असंख्य लोग भूख से तड़प-तड़प कर मर गये। मानवता का यही तकाजा है कि भविष्य में ऐसे युद्ध न हों। इसके लिए दो सुझाव आगे दिये गये हैं

1. निरस्त्रीकरण – द्वितीय विश्वयुद्ध में जितना भी जन-जीवन या सम्पत्ति का विनाश हुआ, उसका मुख्य कारण विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों का खुलकर प्रयोग किया जाना था। अन्त में परमाणु बमों के प्रयोग ने तो जैसे मानवता को ही अनदेखा कर दिया। विभिन्न देशों के आपसी हितों के टकराव के कारण उनके पारस्परिक मतभेद तो सदा चलते और सुलझते रहेंगे, परन्तु शस्त्रों से सुसज्जित राष्ट्रों का रवैया संयमविहीन हो जाता है और वहीं से युद्धों की भयानक विभीषिका का प्रारम्भ होता है। अत: सर्वप्रथम हमें निरस्त्रीकरण को अपनाना होगा।

2. शक्तिशाली संयुक्त राष्ट्र संघ – हमें संयुक्त राष्ट्र संघ को इतना शक्तिशाली व प्रभावी बनाना होगा कि वह विभिन्न राष्ट्रों के आपसी विवादों को प्रभावी ढंग से सुलझा सके, कोई भी राष्ट्र उसके द्वारा लिये गये निर्णयों की अवहेलना न कर सके और आवश्यकता (UPBoardmaster.com) पड़ने पर संयुक्त राष्ट्र संघ बल प्रयोग भी कर सके। सभी राष्ट्र अपने विवादों को संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर ही प्रस्तुत करें और उसके निर्णय को मानने के लिए बाध्य हों। संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्य-क्षेत्र को भी विस्तृत बनाना होगा। संयुक्त राष्ट्र संघ को महाशक्तियों के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए वीटो’ की शक्ति का उन्मूलन किया जाना चाहिए।

प्रश्न 8.
यदि आपको अपने विद्यालय में संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थापना दिवस पर द्वितीय विश्वयुद्ध के भयानक विध्वंस की चर्चा करनी हो तो आप अणु बम से विनष्ट हुए किन दो नगरों की चर्चा करेंगे ? युद्ध पर इसका तात्कालिक प्रभाव क्या पड़ा ?
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के किन दो शहरों पर अणुबम गिराये गये ?
          या
किस देश पर अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध काल में एटम बम गिराया ? उन दो नगरों के नाम भी लिखिए जो बमों के प्रहार से नष्ट हो गये।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध में जान-माल का भयंकर विनाश हुआ तथा पाँच करोड़ से भी अधिक लोग मारे गये। इस युद्ध में सर्वाधिक हानि जर्मनी व रूस को उठानी पड़ी। 26 जुलाई, 1945 ई० को पोट्सडनी सम्मेलन में मित्रराष्ट्रों ने जापान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की माँग की, परन्तु जापान ने उनकी माँग पर कोई ध्यान न देकर युद्ध जारी रखा। फलस्वरूप 6 अगस्त, 1945 ई० को अमेरिका ने जापान के समृद्ध नगर हिरोशिमा पर पहला अणु बम; जिसका नाम ‘लिटिल ब्वाय’ रखा गया था; गिरा दिया। 9 अगस्त, 1945 ई० को अमेरिका ने जापानी नगर नागासाकी पर अपना दूसरा अणुबम; जिसका नाम ‘फैट मैन’ (UPBoardmaster.com) रखा गया था; गिराया। इन दोनों बमों के परिणामस्वरूप वहाँ भयानक तबाही फैल गयी। इन नगरों पर अणुबम के प्रहार के बाद 14 अगस्त, 1945 ई० को जापान ने मित्रराष्ट्रों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

प्रश्न 9.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान किस देश ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए ? इस युद्ध के बाद विश्व किन दो गुटों में बँट गया और इन गुटों का नेतृत्व किन देशों ने किया ?
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व के अनेक राष्ट्र दो गुटों में बँट गये-पूँजीवादी तथा साम्यवादी। पूँजीवादी देशों का नेतृत्व अमेरिका, जबकि साम्यवादी देशों का नेतृत्व रूस के हाथों में था। यद्यपि द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका तथा रूस दोनों ने मिलकर जर्मनी के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी, किन्तु युद्ध के बाद साम्यवाद के प्रसार के कारणों से अमेरिका तथा रूस में गम्भीर मतभेद उत्पन्न हो गये। रूस की बढ़ती हुई शक्ति से चिन्तित होकर अमेरिका तथा कुछ अन्य राष्ट्रों ने नाटो, सीटो तथा सेण्टो नामक सैनिक गुटबन्दियों का निर्माण किया।

प्रश्न 10.
क्या आपकी दृष्टि में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध अणुबम का प्रयोग करना उचित था ? अपने उत्तर की पुष्टि में दो तर्क दीजिए।
उत्तर :
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध अणुबम का प्रयोग उचित नहीं था, क्योंकि –

1. जापान का 7 दिसम्बर, 1941 ई० को अमेरिका के पर्ल हार्बर नामक बन्दरगाह पर आक्रमण उसके नौसैनिक अड्डे पर केन्द्रित था। इस आक्रमण में अमेरिका के 20 युद्धपोत और 250 विमान नष्ट हुए थे, परन्तु कोई विशेष जन-हानि नहीं हुई थी। अमेरिका को भी जवाबी कार्यवाही में जापान के सैनिक ठिकानों को निशाना बनाना चाहिए था, परन्तु उसने हिरोशिमा और नागासाकी के सघन जन आबादी वाले 8 नगरों पर अणुबम गिराकर एक अमानवीय कृत्य किया, जिसमें जितने लोग मारे गये उनसे कई गुना अधिक के जीवन बर्बाद हो गये।

2. पर्ल हार्बर बन्दरगाह पर जापानी बमबारी दिसम्बर, 1941 ई० में की गयी थी। अमेरिका ने अणुबम 6 व 9 अगस्त, 1945 को जापानी नगरों पर गिराये। अमेरिका के पास पर्ल हार्बर पर बमबारी के उपरान्त होने वाले दूरगामी परिणामों का विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त समय था। लेकिन अमेरिका ने दूरदर्शिता नहीं दिखायी। अणुबम के प्रयोग ने द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् एक शीत युद्ध तथा परमाणु अस्त्रों की होड़ को जन्म दिया, जिसने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया।

प्रश्न 11.
1941 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा क्यों की ? उन दो नगरों के नाम लिखिए जो अणु बम द्वारा नष्ट कर दिये गये थे। ये नगर किस देश में हैं ?
          या
द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका क्यों शामिल हुआ ? जापान आत्मसमर्पण करने को क्यों विवश हुआ ?
उत्तर :
जापान सम्पूर्ण एशिया पर अपना प्रभाव स्थापित करना चाहता था। अत: 7 दिसम्बर, 1941 ई० को अचानक ही जापानी सेना ने अमेरिका के प्रशान्त महासागर स्थित नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर भयानक आक्रमण कर दिया जिसमें अमेरिका को अत्यन्त जान-माल की हानि हुई। फलस्वरूप अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

अमेरिका ने जीपान के दो प्रमुख नगरों हिरोशिमा और (UPBoardmaster.com) नागासाकी पर अणु बम गिराये जिसके कारण लाखों लोगों की मृत्यु हो गयी। इस विनाशलीला को देखकर जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।

प्रश्न 12. 
हिटलर कौन था? उसकी नीतियों ने किस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध को प्रभावित किया?
उत्तर :
हिटलर जर्मनी का प्रधानमंत्री था जो बाद में वहाँ का तानाशाह बन गया। हिटलर ने वर्साय सन्धि-पत्र की अवहेलना करके जर्मनी का शस्त्रीकरण आरम्भ कर दिया, क्योंकि वह विश्व विजय करना चाहता था। इससे सम्पूर्ण यूरोप में खलबली मच गई। हिटलर की बढ़ती हुई शक्ति से भयभीत होकर यूरोप के राष्ट्र अपनी सुरक्षा के लिए युद्ध की तैयारियाँ करने लगे। यूरोप के राष्ट्रों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर गुट बना लिये जिसके कारण द्वितीय विश्वयुद्ध का आरम्भ हुआ।।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
द्वितीय विश्वयुद्ध का आरम्भ कब और किसने किया ?
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध का आरम्भ जर्मनी ने 1 सितम्बर, 1939 ई० को पोलैण्ड पर आक्रमण के साथ किया।

प्रश्न 2.
द्वितीय विश्वयुद्ध कब से कब तक चला ?
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 ई० से 1945 ई० तक चला।

प्रश्न 3.
धुरी-राष्ट्रों में कौन-कौन-से देश सम्मिलित थे ?
उत्तर :
धुरी-राष्ट्रों में जर्मनी, इटली तथा जापान सम्मिलित थे।

प्रश्न 4.
जर्मनी और इटली के तानाशाहों के नाम लिखिए।
उत्तर :
जर्मनी का तानाशाह हिटलर तथा इटली का तानाशाह मुसोलिनी था।

प्रश्न 5.
‘नकली युद्ध’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
सितम्बर, 1939 ई० से अप्रैल, 1940 ई० तक, जब तक कि वास्तविक विश्वयुद्ध नहीं छिड़ा था, उसे ‘नकली युद्ध’ कहा जाता है।

प्रश्न 6.
मित्रराष्ट्रों में कौन-कौन से देश सम्मिलित थे ?
उत्तर :
मित्रराष्ट्रों में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ तथा फ्रांस सम्मिलित थे।

प्रश्न 7.
द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका मित्रराष्ट्रों के पक्ष में क्यों शामिल हुआ ?
          या
अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध में किन कारणों से प्रवेश किया ?
उत्तर :
जापान द्वारा अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर बमबारी (UPBoardmaster.com) करने से सुदूरपूर्व में अमेरिका के हित खतरे में पड़ गए थे। इसीलिए अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्रराष्ट्रों की ओर से प्रवेश किया।

प्रश्न 8.
अमेरिका ने परमाणु बम का प्रयोग सर्वप्रथम कब और कहाँ किया ?
उत्तर :
अमेरिका ने परमाणु बम का प्रयोग सर्वप्रथम 6 अगस्त, 1945 ई० को जापान के समृद्ध नगर हिरोशिमा पर किया गया।

प्रश्न 9.
जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कब किया ?
उत्तर :
जर्मनी ने 7 मई, 1945 ई० को बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया।

प्रश्न 10.
जापान ने आत्मसमर्पण कब और क्यों किया ?
उत्तर :
जापान ने हिरोशिमा और नागासाकी नगरों पर अणुबम प्रहार होने के बाद 14 अगस्त, 1945 ई० को आत्मसमर्पण किया, जबकि वास्तविक समर्पण कार्य 2 सितम्बर, 1945 ई० को सम्पन्न हुआ।

प्रश्न 11.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दो महत्त्वपूर्ण परिणाम लिखिए।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध के दो महत्त्वपूर्ण परिणाम निम्नलिखित हैं—(1) धन और जन का भयंकर विनाश और संहार। (2) विश्व में दो गुटों का निर्माण एवं शीतयुद्ध का प्रारम्भ।

प्रश्न 12.
जापान के उन दो नगरों का उल्लेख कीजिए जो अणु बम द्वारा विनष्ट हुए।
उत्तर :
हिरोशिमा तथा (UPBoardmaster.com) नागासाकी।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. द्वितीय विश्वयुद्ध का मूल कारण क्या था?

(क) वर्साय की सन्धि
(ख) जर्मनी में नाज़ी पार्टी का उत्थान
(ग) फ्रांस की महत्त्वाकांक्षा।
(घ) साम्राज्यवादी भावना

2. द्वितीय विश्वयुद्ध का आरम्भ कब हुआ था

(क) 28 जुलाई, 1914 ई० को ।
(ख) 28 जून, 1919 ई० को।
(ग) 1 सितम्बर, 1939 ई० को
(घ) 3 सितम्बर, 1939 ई० को

3. द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रयुक्त होने वाला सबसे घातक अस्त्र कौन-सा था?

(क) टैंक
(ख) मिसाइल
(ग) परमाणु बम
(घ) हाइड्रोजन बम

4. इंग्लैण्ड का युद्धकालीन प्रधानमन्त्री कौन था?

(क) चर्चिल
(ख) चेम्बरलेन
(ग) पामस्टर्न
(घ) लॉयड जॉर्ज

5. जर्मनी ने आत्मसमर्पण कब किया?

(क) 1 मई, 1945 ई० को
(ख) 2 मई, 1945 ई० को
(ग) 7 मई, 1945 ई० को
(घ) 8 मई, 1945 ई० को

6. द्वितीय विश्वयुद्ध में अणु बम किस देश पर गिराया गया था?

(क) जापान
(ख) जर्मनी
(ग) कोरिया
(घ) इटली

7. जापान का वास्तविक आत्मसमर्पण कब हुआ ?

(क) 7 मई, 1945 ई० को
(ख) 14 अगस्त, 1945 ई० को
(ग) 2 सितम्बर, 1945 ई० को
(घ) 6 अगस्त, 1945 ई० को

8. अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया गया था

(क) 6 अगस्त, 1945 ई० को
(ख) 9 अगस्त, 1945 ई० को
(ग) 14 अगस्त, 1945 ई० को
(घ) 2 सितम्बर, 1945 ई० को

9. पर्ल हार्बर कहाँ स्थित है?

(क) प्रशान्त महासागर में
(ख) अन्ध महासागर में
(ग) हिन्द महासागर में
(घ) चीन सागर में

10. जर्मनी का तानाशाह कौन था?

(क) मुसोलिनी
(ख) हिटलर
(ग) स्टालिन
(घ) मार्शल टीटो

11. द्वितीय विश्वयुद्ध कब-से-कब तक चला?

(क) 1939 ई० से 1942 ई० तक
(ख) 1939 ई० से 1943 ई० तक
(ग) 1939 ई० से 1944 ई० तक
(घ) 1939 ई० से 1945 ई० तक

12. वर्साय सन्धि को अस्वीकार करने वाला शासक था|

(क) स्टालिन
(ख) मुसोलिनी
(ग) हिटलर
(घ) जनरल फैंको

13. निम्नलिखित में से किस युद्ध में इटली ने भाग लिया था ?

(क) प्रथम विश्वयुद्ध में
(ख) द्वितीय विश्वयुद्ध में
(ग) दोनों युद्धों में ।
(घ) इनमें से किसी में नहीं

14. हिटलर का सम्बन्ध किस देश से था ?

(क) फ्रांस
(ख) जर्मनी
(ग) ऑस्ट्रिया
(घ) जापान

15. संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में सम्मिलित होने का तात्कालिक कारण था (2015, 18)

(क) हिटलर द्वारा रूस पर आक्रमण
(ख) नालियों द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण
(ग) जापान द्वारा पर्ल हार्बर पर आक्रमण
(घ) इटली द्वारा अलवानिया पर आक्रमण

16. पर्ल हार्बर पर आक्रमण निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित है?

(क) ऑस्ट्रिया-प्रशिया युद्ध
(ख) फ्रेंच-प्रशिया युद्ध
(ग) प्रथम विश्वयुद्ध
(घ) द्वितीय विश्वयुद्ध

उतरमाला

 Class 10 Social Science Chapter 9 (Section 1) 1

UP Board Master for Class 10 Social Science chapter List

Leave a Comment